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 ग़ज़ल गायकी का मशाल जलाने वाले

भारत के संगीत जगत में ग़ज़ल गायकी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने वाले विख्यात गायक पंकज उधास हमारे बीच नहीं रहे। 26 फरवरी, 2024 को 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके जाने से संगीत प्रेमियों को गहरा आघात पहुंचा है।

पंकज उधास का जन्म 17 मई, 1951 को गुजरात के जीतपुर में हुआ था। संगीत उनके खून में था। बचपन से ही संगीत की दुनिया उन्हें अपनी ओर खींचती थी। मात्र 6 वर्ष की आयु से ही उन्होंने संगीत का अभ्यास शुरू कर दिया था। स्कूल के प्रार्थना सभाओं में गायन कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

पंकज उधास की आवाज में जादू था। उनकी ग़ज़लें प्रेम, दर्द, जुदाई और जीवन के विभिन्न पहलुओं को इतनी खूबसूरती से बयां करती थीं कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। "चिट्ठी आई है", "जिंदगी तू है ही", "फीर कब होगा दीदार" जैसे उनके गीत आज भी श्रोताओं के दिलों में राज करते हैं।

पंकज उधास ने न सिर्फ ग़ज़ल गायकी में बल्कि फिल्मों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। उन्होंने कई फिल्मों के लिए सु melodious गीत गाए। उनके योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2006 में पद्मश्री से सम्मानित किया।

पंकज उधास का निधन भले ही हो गया हो, लेकिन उनकी मधुर आवाज और उनकी ग़ज़लें हमेशा अमर रहेंगी। वह आने वाली पीढ़ियों को भी ग़ज़ल गायकी की विरासत सौंप कर गए हैं।

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